HighLights:
- 30 घंटे तक जागने के बाद 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज करने वालों ने बेहतर प्रदर्शन किया
- 90 मिनट की झपकी लेने वाले प्रतिभागियों का प्रदर्शन भी बेहतर रहा
- नींद की कमी से एकाग्रता, सीखने की क्षमता और याददाश्त प्रभावित हो सकती है
- एक्सरसाइज और झपकी पर्याप्त रात की नींद का विकल्प नहीं हैं
- बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से 7–9 घंटे की नींद लेना जरूरी है
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): क्या आप भी देर रात तक जागते हैं और अगले दिन छोटी-छोटी बातें भूलने लगते हैं? कभी किसी का नाम याद नहीं आता, तो कभी पढ़ी हुई जानकारी दिमाग में टिक नहीं पाती। नींद पूरी नहीं होने का असर हमारी एकाग्रता, सीखने की क्षमता और याददाश्त पर पड़ सकता है। लेकिन एक नई रिसर्च में सामने आया है कि नींद की कमी की स्थिति में थोड़ी देर की एरोबिक एक्सरसाइज या झपकी लेने से नई यादें बनाने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि लंबे समय तक जागने के बाद 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज करने वाले और 90 मिनट की झपकी लेने वाले प्रतिभागियों ने तस्वीरों को पहचानने के टेस्ट में बिना एक्सरसाइज वाले समूह की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। यह निष्कर्ष इस बात की ओर इशारा करता है कि शारीरिक गतिविधि और नींद, दोनों ही दिमाग के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।
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नींद की कमी और याददाश्त पर क्या कहती है रिसर्च?
अध्ययन में 18 से 35 वर्ष की उम्र के 53 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को 30 घंटे तक जागने के बाद अलग-अलग समूहों में बांटकर उनकी याददाश्त से जुड़ी क्षमता का आकलन किया गया। पहले समूह के प्रतिभागियों ने 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज की। दूसरे समूह को 90 मिनट की झपकी लेने का अवसर दिया गया। वहीं, तीसरे समूह के प्रतिभागियों ने एक्सरसाइज बाइक पर बैठकर बिना व्यायाम किए समय बिताया।
इसके बाद प्रतिभागियों की याददाश्त जांचने के लिए तस्वीरों को पहचानने वाला टेस्ट किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सरसाइज करने वाले समूह ने लगभग 56 प्रतिशत और झपकी लेने वाले समूह ने 57 प्रतिशत सही पहचान की। बिना एक्सरसाइज वाले समूह का स्कोर लगभग 46 प्रतिशत रहा। इन परिणामों से संकेत मिलता है कि नींद की कमी के बावजूद थोड़ी देर की शारीरिक गतिविधि या झपकी कुछ परिस्थितियों में याददाश्त से जुड़े प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है। हालांकि, ये आंकड़े इस बात का प्रमाण नहीं हैं कि एक्सरसाइज या झपकी नींद की कमी के सभी दुष्प्रभावों को खत्म कर देती है।
दिमाग पर कैसे असर करती है एक्सरसाइज?
एक्सरसाइज का फायदा केवल शरीर को फिट रखने तक सीमित नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि दिमाग के स्वास्थ्य, एकाग्रता और कुछ प्रकार की याददाश्त को बेहतर बनाए रखने में भी सहायक हो सकती है। अध्ययन के निष्कर्षों के मुताबिक, थोड़ी देर की एरोबिक एक्सरसाइज करने वाले प्रतिभागियों ने तस्वीरों को पहचानने के टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन किया। शोधकर्ताओं ने दिमाग की इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (EEG) जांच के जरिए उसकी गतिविधियों का भी अध्ययन किया।
एरोबिक एक्सरसाइज में तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना और हल्की दौड़ जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार की गई ऐसी गतिविधियां सतर्कता बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, केवल 20 मिनट एक्सरसाइज कर लेने से नींद की कमी के सभी प्रभाव समाप्त हो जाएंगे, ऐसा मानना सही नहीं होगा। अध्ययन में मिले परिणामों को समझने के लिए इसके प्रतिभागियों, परीक्षण की परिस्थितियों और सीमाओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
90 मिनट की झपकी से कैसे मिल सकता है फायदा?
नींद के दौरान दिमाग दिनभर सीखी गई जानकारी को व्यवस्थित करने और यादों को मजबूत बनाने से जुड़ी प्रक्रियाओं में हिस्सा लेता है। इसलिए थकान महसूस होने पर झपकी लेने से कुछ लोगों को सतर्कता और मानसिक प्रदर्शन में मदद मिल सकती है। इस अध्ययन में 90 मिनट की झपकी लेने वाले समूह का प्रदर्शन तस्वीरों की सही पहचान करने में सबसे बेहतर रहा। उसका स्कोर लगभग 57 प्रतिशत था, जबकि एक्सरसाइज करने वाले समूह ने लगभग 56 प्रतिशत सही पहचान की।
दोनों समूहों के परिणामों में बहुत कम अंतर था। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि झपकी हमेशा एक्सरसाइज से बेहतर होती है या इसके विपरीत। अलग-अलग परिस्थितियों में दोनों का असर अलग हो सकता है। यदि रात में नींद पूरी नहीं हुई है, तो परिस्थितियों के अनुसार थोड़ी देर आराम करना या हल्की शारीरिक गतिविधि करना उपयोगी हो सकता है। लेकिन झपकी का समय ऐसा रखें कि रात की नियमित नींद प्रभावित न हो।
नींद पूरी नहीं होने से दिमाग पर क्या पड़ता है असर?
पर्याप्त नींद न मिलने से अगले दिन केवल थकान ही नहीं होती, बल्कि कई मानसिक क्षमताएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:
1. याददाश्त पर असर: नींद सीखने और नई जानकारी को याद रखने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लगातार कम सोने से नई जानकारी याद करना और जरूरत के समय उसे याद कर पाना मुश्किल हो सकता है।
2. एकाग्रता में कमी: नींद की कमी से ध्यान लगाने की क्षमता कमजोर हो सकती है। पढ़ाई, ऑफिस के काम और वाहन चलाने जैसी गतिविधियों में इसका असर दिखाई दे सकता है।
3. मानसिक थकान और ब्रेन फॉग: पर्याप्त नींद नहीं मिलने पर दिमाग सुस्त महसूस हो सकता है। सोचने, निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान करने में अधिक समय लग सकता है।
4. चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव: कम नींद का असर भावनाओं पर भी पड़ सकता है। व्यक्ति अधिक चिड़चिड़ा महसूस कर सकता है और तनाव से निपटने में कठिनाई हो सकती है।
5. लंबे समय तक स्वास्थ्य पर प्रभाव: लगातार अपर्याप्त नींद को कई शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है। इसलिए नींद की कमी को रोजमर्रा की सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
गहरी नींद और REM नींद क्यों हैं जरूरी?
नींद के दौरान दिमाग अलग-अलग चरणों से गुजरता है। नॉन-REM नींद और REM नींद दोनों ही स्वस्थ नींद चक्र का हिस्सा हैं और याददाश्त तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाती हैं। नॉन-REM नींद के दौरान दिमाग की कुछ ऐसी प्रक्रियाएं सक्रिय होती हैं, जो सीखी गई जानकारी और यादों को मजबूत करने में योगदान देती हैं। REM नींद का संबंध भावनात्मक यादों और सीखने की कुछ प्रक्रियाओं से भी है। याददाश्त को बेहतर बनाए रखने के लिए केवल किसी एक चरण की नींद पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नियमित रूप से पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
रोज कितने घंटे सोना चाहिए?
वयस्कों के लिए आम तौर पर हर रात कम से कम सात घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। कई लोगों को अपनी उम्र, स्वास्थ्य और दैनिक गतिविधियों के अनुसार सात से नौ घंटे तक नींद की जरूरत हो सकती है।
बेहतर नींद के लिए इन आदतों को अपनाया जा सकता है:
रोजाना सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखें।
सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।
शाम या रात में कैफीन का सेवन सीमित रखें।
सोने का कमरा शांत, आरामदायक और जरूरत के अनुसार अंधेरा रखें।
नियमित रूप से हल्की या मध्यम शारीरिक गतिविधि करें।
दिन में झपकी लेते हैं, तो उसकी अवधि और समय का ध्यान रखें, ताकि रात की नींद प्रभावित न हो।
क्या छोटी झपकी रात की नींद की भरपाई कर सकती है?
छोटी झपकी कुछ समय के लिए सतर्कता और थकान में सुधार कर सकती है, लेकिन यह नियमित रूप से कम सोने की भरपाई नहीं कर सकती। इसी तरह, एक्सरसाइज करने से भी शरीर को जरूरी नींद का विकल्प नहीं मिलता। यदि आप लगातार देर रात तक जागते हैं, तो बेहतर होगा कि अपनी दिनचर्या में बदलाव करके पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। लंबे समय तक नींद की कमी होने पर केवल कॉफी, एक्सरसाइज या झपकी के सहारे काम चलाना उचित नहीं है। यदि याददाश्त की समस्या लगातार बनी रहती है, रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं या भूलने की समस्या अचानक शुरू होती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। अचानक भ्रम, बोलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
निष्कर्ष
नई रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि नींद की कमी के बाद 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज या 90 मिनट की झपकी याददाश्त से जुड़े कुछ परीक्षणों में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकती है। लेकिन अध्ययन में शामिल लोगों और परीक्षण की सीमित परिस्थितियों को देखते हुए इसे हर व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता।याददाश्त और दिमाग की सेहत बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ दिनचर्या। एक्सरसाइज और झपकी सहायक हो सकती हैं, लेकिन अच्छी रात की नींद का विकल्प नहीं हैं।