बिहार में अपराध पर सरकार का दावा: मर्डर 10% और डकैती 31% घटी, सजा दिलाने में भी तेजी
बिहार सरकार का दावा है कि 2025 के मुकाबले 2026 में हत्या 10.1%, डकैती 31.32% और दंगों के मामलों में 18.97% कमी आई है। सरकार ने अपराधियों को सजा दिलाने की दर बढ़ने की भी जानकारी दी।
HighLights:
- बिहार में 2025 के मुकाबले 2026 में हत्या के मामलों में 10.1% की कमी का दावा
- डकैती के मामलों में 31.32% और दंगों में 18.97% गिरावट
- 64,733 कांडों में 86,760 दोषियों को सजा दिलाने का सरकार का दावा
- दो दोषियों को मृत्युदंड और 553 को आजीवन कारावास
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार सरकार ने राज्य में अपराध की स्थिति को लेकर आंकड़े जारी करते हुए दावा किया है कि पिछले साल की तुलना में 2026 में कई गंभीर अपराधों में कमी आई है। सरकार के अनुसार, 2025 के मुकाबले इस साल हत्या के मामलों में 10.1 प्रतिशत, डकैती में 31.32 प्रतिशत और दंगों के मामलों में 18.97 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
गृह विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने शुक्रवार को पटना स्थित सूचना भवन के संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सूचना के बेहतर संग्रह, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और लगातार निगरानी के कारण अपराध की कई श्रेणियों में कमी आई है।
डकैती के मामलों में सबसे ज्यादा गिरावट
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 2026 में डकैती के मामलों में सबसे अधिक 31.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं हत्या के मामलों में 10.1 प्रतिशत और दंगों में 18.97 प्रतिशत की कमी आई है।
गृह विभाग के सचिव ने कहा कि सूचना तंत्र को मजबूत करने और घटनाओं पर तेजी से कार्रवाई का असर सांप्रदायिक तनाव से जुड़े मामलों में भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025-26 में सांप्रदायिक घटनाओं से संबंधित 263 मामलों में अभियोजन की स्वीकृति दी गई है। सभी जिलों को इन मामलों में चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
बिहार नक्सल मुक्त होने का दावा
प्रणव कुमार ने कहा कि लगातार चलाए गए नक्सल विरोधी अभियानों के कारण वर्तमान में बिहार के सभी जिले नक्सल मुक्त हो चुके हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने औरंगाबाद, गया, जमुई और लखीसराय को लीगेसी एवं थ्रस्ट जिलों के तौर पर चिह्नित कर रखा है।
अपराधियों को सजा दिलाने की रफ्तार बढ़ी
सरकार ने अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उन्हें अदालत से सजा दिलाने की प्रक्रिया में भी तेजी आने का दावा किया है। सचिव के अनुसार, इस साल मई तक 64,733 कांडों में 86,760 दोषियों को सजा दिलाई गई।
इनमें 2 दोषियों को मृत्युदंड, 553 को आजीवन कारावास और 297 दोषियों को 10 वर्ष से अधिक की सजा मिली है। सरकार का अनुमान है कि पिछले वर्षों की तुलना में 2026 में दोषियों को सजा दिलाने की दर में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
पुलिसिंग में फिर लागू होगी जोनल व्यवस्था
प्रेस वार्ता में डीजीपी विनय कुमार ने पुलिसिंग व्यवस्था में बदलाव की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार में जल्द ही मौजूदा रेंज व्यवस्था को हटाकर पहले की तरह जोनल व्यवस्था लागू की जाएगी। डीजीपी ने साइबर अपराध को पुलिस के सामने बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बिहार उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां सभी जिलों में साइबर थाने काम कर रहे हैं। राज्य में साइबर अपराध से संबंधित सालाना औसतन 7 हजार से अधिक एफआईआर दर्ज हो रही हैं। प्रेस वार्ता में एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार, एडीजी विधि-व्यवस्था केएस अनुपम और गृह विभाग के विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह भी मौजूद रहे।
सरकार के दावे का क्या है मतलब?
बिहार सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक गंभीर अपराधों में कमी और दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया में तेजी पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को बेहतर होने का संकेत देती है। हालांकि, अपराध के आंकड़ों का आकलन करते समय अलग-अलग अपराध श्रेणियों में दर्ज मामलों, पुलिस कार्रवाई और अदालतों में लंबित मामलों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। फिलहाल सरकार का जोर अपराध नियंत्रण के साथ त्वरित कार्रवाई, बेहतर सूचना तंत्र, साइबर अपराध पर निगरानी और दोषियों को जल्द सजा दिलाने पर है।
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