HighLights:
- धनबाद के डिगवाडीह स्थित डी-नोबिली स्कूल की टीम को राष्ट्रीय पुरस्कार
- ‘DNS नवऊर्जा’ ने विकसित भारत बिल्डाथॉन 2025 के ग्रैंड फिनाले में बनाई पहचान
- मीथेन गैस से CNG और बिजली बनाने की अवधारणा पर आधारित मॉडल
- टीम को एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली
धनबाद (Threesocieties.com Desk): झरिया कोयलांचल की पहचान लंबे समय से भूमिगत आग, जमीन धंसने के खतरे और पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़ी रही है। लेकिन क्या इसी समस्या से ऊर्जा उत्पादन का रास्ता भी निकल सकता है? धनबाद के डिगवाडीह स्थित डी-नोबिली स्कूल के विद्यार्थियों ने इसी सवाल को केंद्र में रखकर एक अनूठा वैज्ञानिक मॉडल तैयार किया है। मीथेन गैस का सुरक्षित संग्रहण कर उससे संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) और बिजली बनाने की अवधारणा पर आधारित इस परियोजना ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की है।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से आयोजित ‘विकसित भारत बिल्डाथॉन 2025’ के ग्रैंड फिनाले में स्कूल की टीम ‘DNS नवऊर्जा’ को राष्ट्रीय पुरस्कार और एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि से धनबाद और झरिया कोयलांचल का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है।
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राष्ट्रीय मंच पर चमकी डिगवाडीह के विद्यार्थियों की प्रतिभा
नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में आयोजित समापन समारोह में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने टीम को सम्मानित किया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता, वैज्ञानिक सोच और समस्या के समाधान की क्षमता का प्रदर्शन किया।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रतियोगिता में देशभर से 2.87 लाख से अधिक नवाचार परियोजनाएं शामिल हुई थीं। इतने बड़े स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करना टीम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सफलता ने यह भी दिखाया कि स्थानीय समस्याओं को समझकर विद्यार्थी विज्ञान और तकनीक के माध्यम से उनके समाधान की दिशा में नए विचार सामने ला सकते हैं।
झरिया की मीथेन गैस से CNG और बिजली बनाने का विचार
झरिया कोयला क्षेत्र में भूमिगत आग और उससे जुड़ी गैसों का मुद्दा लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। भूमिगत कोयला आग से पर्यावरण, स्थानीय आबादी, जमीन की स्थिरता और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में गैसों के सुरक्षित प्रबंधन और संभावित उपयोग पर शोध की काफी संभावनाएं हैं।डी-नोबिली स्कूल के विद्यार्थियों ने इसी चुनौती को अपने मॉडल का आधार बनाया। टीम की परियोजना झरिया क्षेत्र से निकलने वाली मीथेन गैस को नियंत्रित तरीके से एकत्र करने और उसका इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन में करने की अवधारणा पर आधारित है।
मॉडल में मीथेन गैस से दो संभावित उपयोगों पर जोर दिया गया है:
CNG उत्पादन: मीथेन को उपयुक्त तकनीकी प्रक्रिया से उपयोगी ईंधन के रूप में तैयार करने की अवधारणा।
बिजली उत्पादन: गैस की ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए करने की संभावना।
इस विचार का मुख्य उद्देश्य ऐसी गैस, जो अनियंत्रित रूप से निकलने पर जोखिम पैदा कर सकती है, उसके सुरक्षित प्रबंधन और संभावित उपयोग के रास्ते तलाशना है।
हालांकि, मॉडल में दिखाई गई अवधारणा को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए विस्तृत तकनीकी अध्ययन, गैस की गुणवत्ता की जांच, सुरक्षित संग्रहण व्यवस्था और विशेषज्ञों की निगरानी आवश्यक होगी।
भूमिगत आग की समस्या के बीच क्यों अहम है यह मॉडल?
झरिया कोयलांचल में भूमिगत आग केवल पर्यावरण की समस्या नहीं है। इसका संबंध स्थानीय लोगों की सुरक्षा, आवास, बुनियादी ढांचे और कोयला संसाधनों के प्रबंधन से भी है। आग और गैस के प्रभाव वाले क्षेत्रों में किसी भी तरह की तकनीकी पहल करते समय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी पड़ती है।मीथेन ज्वलनशील गैस है। उचित मात्रा में हवा के साथ मिलने पर यह विस्फोटक मिश्रण बना सकती है। इसलिए इसका संग्रहण, परिवहन और उपयोग विशेष सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही किया जा सकता है।
ऐसे में विद्यार्थियों का मॉडल समस्या को केवल खतरे के रूप में देखने के बजाय उसके तकनीकी समाधान की संभावनाओं पर विचार करने का प्रयास है। यदि भविष्य में वैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से इस तरह की अवधारणा की उपयोगिता साबित होती है, तो इससे गैस प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन से संबंधित नए विकल्पों पर काम करने का रास्ता खुल सकता है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे झरिया की भूमिगत आग का व्यावहारिक समाधान या बड़े पैमाने पर CNG-बिजली उत्पादन की सफल तकनीक नहीं कहा जा सकता। इसके लिए स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण और विशेषज्ञों का मूल्यांकन जरूरी होगा।
जिला और राज्य स्तर से होते हुए ग्रैंड फिनाले तक पहुंची टीम
‘DNS नवऊर्जा’ की उपलब्धि एक चरण में नहीं मिली। टीम ने जिला और राज्य स्तर के विभिन्न चरणों में भाग लेते हुए राष्ट्रीय स्तर के ग्रैंड फिनाले तक का सफर तय किया। इस दौरान विद्यार्थियों को अपनी परियोजना का विचार प्रस्तुत करने, मॉडल तैयार करने और उसके उद्देश्य को समझाने का अवसर मिला। राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलने से उनकी मेहनत को पहचान मिली। टीम में उत्कृष्ट पॉल, लकी कुमार, आर्यन राज सिंह, गौरव कुमार रवानी और जागृति शामिल रहे। इन विद्यार्थियों ने मिलकर झरिया क्षेत्र की एक गंभीर स्थानीय समस्या को नवाचार के विषय के रूप में चुना।
शिक्षकों के मार्गदर्शन में तैयार हुई परियोजना
इस उपलब्धि में विद्यार्थियों के साथ उनके शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। टीम ने अपनी सफलता का श्रेय मार्गदर्शक शिक्षिका अनुराधा यादव और शिक्षक मोहम्मद मुजम्मिल आलम अंसारी को दिया। विद्यार्थियों ने स्कूल के प्राचार्य फादर सुशील सुमन करकट्टा और उप-प्राचार्य सुरेश चक्रवर्ती के सहयोग तथा प्रोत्साहन के लिए भी आभार जताया। शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने स्थानीय समस्या को समझते हुए उसके संभावित तकनीकी समाधान पर काम किया। यह उपलब्धि स्कूल में विज्ञान आधारित शिक्षा, रचनात्मक सोच और प्रोजेक्ट के माध्यम से सीखने के महत्व को भी सामने लाती है।
एक लाख रुपये का पुरस्कार, आगे शोध की उम्मीद
राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ एक लाख रुपये की राशि मिलना टीम के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है। इस तरह की उपलब्धियां विद्यार्थियों को विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। अब इस तरह के मॉडल की अगली महत्वपूर्ण कसौटी उसकी वैज्ञानिक व्यवहार्यता होगी। मीथेन गैस को सुरक्षित तरीके से एकत्र करने, उसे उपयोग योग्य बनाने, संभावित ऊर्जा उत्पादन की क्षमता और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करना आवश्यक होगा।विशेषज्ञों की मदद से यदि इस अवधारणा पर आगे अध्ययन किया जाता है, तो विद्यार्थियों के विचार को अधिक वैज्ञानिक रूप देने और उसकी सीमाओं को समझने में मदद मिल सकती है।
झरिया की समस्या से निकला नवाचार का संदेश
डी-नोबिली स्कूल, डिगवाडीह के विद्यार्थियों की यह उपलब्धि स्थानीय समस्याओं को नवाचार के अवसर के रूप में देखने का संदेश देती है। झरिया की भूमिगत आग और मीथेन गैस से जुड़े खतरे गंभीर हैं, लेकिन उनके सुरक्षित प्रबंधन और संभावित उपयोग पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से काम करना भी जरूरी है।‘DNS नवऊर्जा’ की टीम ने अपने मॉडल के माध्यम से इसी दिशा में एक विचार प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय पुरस्कार ने इस प्रयास को पहचान दी है। अब आगे की तकनीकी जांच और विशेषज्ञ मूल्यांकन से ही यह तय हो सकेगा कि इस अवधारणा को वास्तविक परिस्थितियों में किस हद तक उपयोगी बनाया जा सकता है।