Highlights:
- IIT (ISM) धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा का प्रतिष्ठित शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयन
- फेडरेशन फॉर वर्ल्ड एकेडमिक्स की चयन समिति ने किया चयन
- उच्च शिक्षा, अभियांत्रिकी शिक्षा, पावर सिस्टम और नवीकरणीय ऊर्जा में योगदान के लिए मिलेगा सम्मान
- 22 नवंबर को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पुरस्कार प्रदान किये जायेंगे
धनबाद (Threesocieties.com Desk): भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खान विद्यालय), आइआइटी (आइएसएम) धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा को प्रतिष्ठित पद्म विभूषण डॉ. मुरली मनोहर जोशी महान शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है। फेडरेशन फॉर वर्ल्ड एकेडमिक्स की चयन समिति ने उन्हें भारतीय उच्च शिक्षा, अभियांत्रिकी शिक्षा तथा पावर सिस्टम और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में शोध में उल्लेखनीय योगदान के लिए इस सम्मान हेतु चयनित किया है। इस उपलब्धि से आइआइटी (आइएसएम) धनबाद के शैक्षणिक और शोध क्षेत्र की प्रतिष्ठा को एक नई पहचान मिली है।
उच्च शिक्षा और शोध में योगदान के लिए मिलेगा सम्मान
प्रो. सुकुमार मिश्रा का चयन भारतीय उच्च शिक्षा और तकनीकी अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से किया गया है। अभियांत्रिकी शिक्षा, पावर सिस्टम और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शोध एवं शैक्षणिक कार्यों को इस पुरस्कार के लिए प्रमुख आधार बताया गया है। आज के दौर में ऊर्जा की बढ़ती मांग, बिजली व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा के विकल्पों को प्रोत्साहित करने में तकनीकी अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में इन क्षेत्रों में अकादमिक योगदान देने वाले शिक्षाविदों को सम्मानित करना उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रो. मिश्रा का चयन इसी व्यापक शैक्षणिक और शोध योगदान के संदर्भ में किया गया है। उनके चयन से संस्थान के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के बीच भी उत्साह का माहौल बनने की उम्मीद है।
22 नवंबर को नई दिल्ली में दिया जाएगा पुरस्कार
फेडरेशन फॉर वर्ल्ड एकेडमिक्स की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार, डॉ. मुरली मनोहर जोशी महान शिक्षक पुरस्कार 2026 आगामी 22 नवंबर को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आइआइसी) में प्रदान किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डॉ. मुरली मनोहर जोशी स्वयं प्रो. सुकुमार मिश्रा को यह सम्मान प्रदान करेंगे।इस अवसर पर शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और शोध से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों की उपस्थिति रहने की संभावना है। हालांकि, कार्यक्रम में शामिल होने वाले अन्य अतिथियों और प्रतिभागियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
2025 में शुरू किया गया था पुरस्कार
डॉ. मुरली मनोहर जोशी महान शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2025 में फेडरेशन फॉर वर्ल्ड एकेडमिक्स ने की थी। इस पुरस्कार का उद्घाटन पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने किया था। डॉ. जोशी भौतिक विज्ञानी, सांसद और पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रहे हैं।इस पुरस्कार का उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्वों के योगदान को सम्मानित करना है, जिनके लंबे शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सार्वजनिक जीवन के कार्यों ने भारत की बौद्धिक एवं वैज्ञानिक प्रगति को प्रभावित किया है। यह सम्मान केवल शिक्षण तक सीमित न होकर शिक्षा, शोध और समाज के व्यापक विकास में योगदान देने वाले लोगों के कार्यों को पहचान देने की पहल के रूप में देखा जाता है।
आइआइटी (आइएसएम) धनबाद के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
आइआइटी (आइएसएम) धनबाद देश के प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल है। संस्थान में अभियांत्रिकी, ऊर्जा, खनन और विभिन्न तकनीकी विषयों में शिक्षा एवं शोध को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे संस्थान के निदेशक का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन होना संस्थान की शैक्षणिक पहचान के लिहाज से महत्वपूर्ण है।प्रो. सुकुमार मिश्रा को मिलने वाला यह सम्मान उच्च शिक्षा में अकादमिक नेतृत्व, तकनीकी अनुसंधान और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विषयों के महत्व को भी रेखांकित करता है। पावर सिस्टम और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में शोध भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और तकनीकी विकास के नए अवसर तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में योगदान को पहचान
डॉ. मुरली मनोहर जोशी महान शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य उन लोगों के कार्यों को सामने लाना है, जिन्होंने अपने दीर्घकालीन योगदान से शिक्षा, विज्ञान और देश के बौद्धिक विकास को दिशा दी है। प्रो. सुकुमार मिश्रा का इस सम्मान के लिए चयन इसी उद्देश्य से जुड़ा है।22 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले समारोह में पुरस्कार प्रदान किए जाने के साथ ही प्रो. मिश्रा की उपलब्धि आइआइटी (आइएसएम) धनबाद के लिए एक उल्लेखनीय अवसर होगी। यह सम्मान उच्च शिक्षा, अभियांत्रिकी और ऊर्जा अनुसंधान के क्षेत्र में निरंतर काम करने वाले शिक्षाविदों के योगदान को पहचान देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।