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झारंखड:निरसा गांजा तस्करी के झूठे केस में ईसीएल स्टाफ को जेल भेजने की सीआइडी करेगी जांच

  • सीनीयर से लेकर जूनियर पुलिसकर्मी भी आयेंगे लेपेटे में

रांची।निरसा में फरजी तरीके से गांजा बरामद कर बंगाल के ईसीएल स्टाफ चिरंजीत घोष को जेल भेजने मामले की सीआइडी जांच होगी। सीआइडी ने मामले से संबंधित निरसा थाना कांड संख्या 179/ 19 दिनांक 28/08 /2019 को टेकओवर कर लिया है। सीआइडी के एक डीएसपी के नेतृत्व में गठित एसआइटी इस कांड की जांच करेगी।

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सीआइडी जांच के मामले में परोक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से शामिल सीनीयर व जूनियर पुलिसकर्मियों की गर्दन फंस सकती है। मामले में रिकार्ड के अनुसार इंस्पेक्टर सह निरसा ओसी रहे उमेश प्रसाद सिंह व निरसा एसडीपी की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध रही है। रात को जीटी रोड पर कथित जांच, गांजा लदी टवेरा बरामदगी, एफआइआरस सुपरविजन, नो एवीडेंस रिपोर्ट समेत अन्य कार्रवाई संदेहास्पद है।

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गुप्त सूचना पर गांजा लदी टवेरा पकड़ायी, ईसीएल स्टाफ बना नेम्ड एक्युज्ड
निरसा पुलिस ने कथित गुप्ता सूचना पर लगभग 40 किलो गांजा टवेरा गाड़ी बरामद की। गाड़ी में सवार लोग भाग निकले। निरसा ओसी उमेश प्रसाद सिंह की कंपलेन पर ईसीएल स्टाफ चिंरजीत घोष के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गयी। पुलिस गांजा लदी गाड़ी के मालिक व ड्राइवर का पता नहीं की। केस के नेम्ड एक्युज्ड पश्चिम बंगाल से ईसीएलकर्मी चिंरजीत घोष को अरेस्ट कर जेल भेज दी। चिंरजीत की पत्नी जो पश्चिम बंगाल जेल पुलिस की कांस्टेबल है ने बंगाल के सीएम, डीजीपी, झारखंड के डीजीपी समेत अन्य सीनीयर पुलिस अफसरों को पत्र लिखकर कंपलेन की। उसने आरोप लगाया कि साजिश के तहत पश्चिम बंगाल के एक पुलिस अफसर, कोयला तस्कर और धनबाद के पुलिस पदाधिकारी अफसरों ने मिलकर चिरंजीत को झूठा केस में जेल भेज दिया है।

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एसडीपीओ ने दो युवकों को पकड़ कोर्ट में बयान के लिए दिया था प्रेशर
एसडीपीओ निरसा विजय कुशवाहा गांजा के झूठे केस में सही बनाने व चिरंजीत के खिलाफ एवीडेंस के लिए दो युवकों को पकड़ कई दिनों तक पुलिस स्टेशन में रखा गया। बंगाव बस्ताकोला के युवकों से कोर्ट में 164 के तहत बयान दिलवाने की कोशिश की गयी। मामला बढ़ता देख दोनों को छोड़ दिया गया। बंगाल व झारखंड में उपर तक मामले पहुंचने के बाद अपनी गर्दन फंसते देख धनबाद पुलिस बैकफुट पर आ गई। आनन-फानन में को सूचित किया कि जेल में बंद चिरंजीत घोष के खिलाफ कोर्ट में नो एवीडेंस की रिपोर्ट जमा की गयी। इसके बाद चिरंजीत को 27 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद कोर्ट से बेल मिल गयी।

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निरसा थानेदार सस्पेंड, एसडीपीओ को शो कॉज
स्टेट में सत्ता व पुलिस चीफ बदलने के बाद मामले की कंपलेन फिर रांची पहुंची। एडीजी सीआइडी अनिल पाल्टा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बोकारो के डीआइजी प्रभात कुमार को जांच का निर्देश दिया। सीआइडी एडीजी के निर्देश जांच शुरू हुई। जांच में मुख्य रुप से इंस्पेक्टर सह निरसा ओसी उमेश प्रसाद सिंह को दोषी पाया गया। उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। एसीडपीओ को शो कॉज किया गया है।

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धनबाद पुलिस की भूमिका संदिग्ध, सीआइडी एडीजी ने डीजीपी को भेजी रिपोर्ट
सीआइडी एडीजी ने बोकारो डीआइजी की रिपोर्ट के आलोक में डीजीपी को मामले में एक प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि गांजा बरामदगी मामले में इसीएल स्टाफ चिरंजीत को जेल भेजने के पीछे धनबाद पुलिस की भूमिका संदिग्ध है।

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गोड्डा में दर्ज हुआ था चिंरजीत के खिलाफ गांजा का केस
गोड्डा के महगामा पुलिस स्टेशन में भी चिरंजीत घोष के खिलाफ गांजा तस्करी की एफआइआर दर्ज की गयी थी। महगामा थाना कांड संख्या 160-19 के केस में मोहनपुर गांव में निसार आलम के घर में पांच किलो गांजा बरामद हुआ था। निसार की गिरफ्तारी के बाद चिंरजीत का नाम केस में जुटा। हालांकि केस में चिरंजीत की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी।

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