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झारखंड: बोकारो बीजेपी एमएलए बिरंची नारायण ने बीएसएल एजीएम को पीटा, दोनों ओर से पुलिस में कंपलेन,अफसरों ने निकाला जस्टिस मार्च

बोकारो:बोकारो के बीजेपी एमएलए बिरंची नारायण व समर्थकों पर बीएसएल के एजीएम को दौड़ा-दौड़ा कर पीटने का आरोप लगा है. मारपीट में जख्मी बोकारो इस्पात लिमिटेड के नगर सेवा विभाग के एजीएम (लैंड एलॉटमेंट डिपार्टमेंट) अजीत कुमार हॉस्पीटल में एडमिट हैं. एमएलए ने मारपीट से इनकार किया है. बीएस सिटी पुलिस स्टेशन में दोनों ओर से कंपलेन की गयी है.
मारपीट में जख्मी अफसर का कहना है कि बीएसएल की जमीन पर अतिक्रमण की जानकारी मिलने पर वह वहां गये थे. वह तालाब जीर्णोद्धार का काम बंद करने को कहा. एमएलए इसी दौरान वहां बाइक से आये और गाली-गलौज करते हुए मारपीट करने लगे. उन्होंने वहां से भाग कर अपनी जान बचायी. घटना को लेकर दोनों तरफ से प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बीएस सिटी थाना में आवेदन दिया गया है. अफसर ने पुलिस में दिये गये कंपलेन में एमएलए बिरंची नारायण व उनके 20-25 समर्थकों पर मारपीट करने व कार्य में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया है. एमएलए की ओर से कंट्रेक्टर कृष्ण कुमार पांडेय ने डीजीएम अजीत व अन्य के खिलाफ मारपीट करने, काम रोकने व 22 हजार रुपये छीनने का आरोप लगाया है.

पीड़ित अफसर.

अफसर के साथ मारपीट से बीएसएल अफसरों में आक्रोश व्याप्त है. घटना के विरोध में बीएसएल अफसरों ने शाम में नगर सेवा भवन से जस्टिस मार्च निकाला. अफसरों ने एसपी पी मुरूगन से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी. एमएएल बिरंची नारायण ने भी डीसी और एसपी से मिल कर घटना की जानकारी देते हुए एजीएम की कंपलेन की गयी है. एमएलए ने कहा कि बीएसएल सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए एनओसी नहीं देता है. एजीएम अजीत कुमार अतिक्रमण के नाम पर स्थानीय लोगों को परेशान भी करते हैं. एमएलए बिरंची नारायण का कहना है कि मैं आवास में लोगों से मिल रहा था. इसी बीच तालाब जीर्णोद्धार का काम की जानकारी मिलने पर वहां गया था. मैं पहुंचा तो पहले से ही हाथापाई हो रही थी. मैंने बीच-बचाव किया, मारपीट नहीं की. बोकारो की जनता को पता है कि मैं हिंसा व मारपीट में विश्वास नहीं रखता हूं.
बोकारो स्टील ऑफिसर्स एसोसिएशन केअध्यक्ष एके सिंह ने कहा है कि घटना निंदनीय है. अतिक्रमण से शहर बर्बाद हो रहा है.अतिक्रमण हटाने अधिकारी जाते हैं, तो उनके साथ मारपीट की जाती है. उन्हें बेइज्जत किया जाता है. ऐसे में अफसरों का काम करना मुश्किल है. कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है.

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