- विधानसभा चुनाव से पहले ही संगठन बनायेंगे
- नये दोस्त बनाने के लिए भी तैयार
- झामुमो को अलविदा कह चुके,अब वापस नहीं लौटेंगे
रांची। झारखंड के एक्स सीएम चंपई सोरेन झामुमो से लगभग अपना वास्ता खत्म कर चुके हैं, अब वह कोल्हान में भ्रमण कर नई राह की तलाश में हैं। चंपई सोरेन ने कहा कि मैं झारखंड की राजनीति में फिर से सक्रिय रूप से प्रवेश करूंगा। विधानसभा चुनाव से पहले एक संगठन बनाऊंगा। दोस्त बनाने की भी कोशिश करूंगा।
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जोहार चाईबासा !
— Champai Soren (@ChampaiSoren) August 22, 2024
कोल्हान में समर्थकों के उत्साह से अभिभूत हूँ। आप सभी का प्यार, सहयोग व समर्थन ही मेरे जीवन की पूंजी है। pic.twitter.com/DRWsOLH564
चंपाई ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर सब कुछ बता दूंगा। उन्होंने कहा कि मैंने सरायकेला और चाईबासा सहित तीन जिलों का दौरा किया। यह मेरे नये अध्याय के दौरे का दूसरा दिन था। सब कुछ ठीक चल रहा है, जनता हमारे साथ जुड़ रही है"। चंपई ने मीडिया को बताया कि वह जल्द ही अपना फैसला सभी को बतायेंगे। झामुमो नेताओं के संपर्क करने के सवाल पर चंपई ने कहा, "मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं"।
अपनी योजनाओं पर अडिग हैं चंपई
दिल्ली में तीन दिन कैंप कर वापस अपने गृहक्षेत्र लौटने के दूसरे दिन बुधवार को चंपई ने तीन जनसभाओं को संबोधित किया। सभा में उनके समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी। सरायकेला जिले में स्थित अपने पैतृक गांव जिलिंगगोड़ा तथा पड़ोस के पोटका और महुलडीह में सभा को संबोधित करते हुए चंपई ने कहा कि झामुमो नेताओं के हाथों अपमान का सामना करने के बाद वह आगे की अपनी योजनाओं पर अडिग हैं।उन्होंने कहा कि यह मेरे जीवन का नया अध्याय है। भविष्य में अन्य दलों के साथ गठबंधन का संकेत देते हुए चंपई ने कहा कि नया संगठन खड़ा करने के बाद अगर रास्ते में कोई अच्छा दोस्त मिल गया तो उसके साथ आगे बढ़ूंगा।
JMM में नहीं जाऊंगा वापस
झामुमो की चर्चा करते हुए चंपई ने कहा कि गुरुजी शिबू सोरेन के बाद मैं पार्टी का सबसे वरीय नेता हूं। इसके बावजूद मेरा अपमान हुआ। मैं झामुमो से विदा ले चुका हूं। अब मैं किसी के कहने पर भी झामुमो में वापस नहीं जाऊंगा। चंपाई ने अपने पैतृक गांव जिलिंगगोरा में कहा कि मेरे जीवन मेंझामुमो का चैप्टर अब बंद हो चुका है। उस पार्टी में वापस लौटनेका कोई सवाल ही नहीं है, जिसे मैंने पिछले 45 सालों से अपने खून-पसीने से सींचा है।
समर्थकों के बीच अपने प्रभाव का आकलन करने में जुटे चंपाई
झारखंड में सत्तारूढ़ झामुमो से बगावत कर अपनी अलग राजनीतिक राह तैयार करने में जुटे चंपई सोरेन सधे कदमों से आगे बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि वह धीरे-धीरे अपने पत्ते भी खोल रहे हैं।नई दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने लिखित बयान जारी कर एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश की।उन्होंने पार्टी में अपने साथ हुए व्यवहार को अपमानजनक करार देते हुए उन परिस्थितियों का उल्लेख किया, जो वह उनके समक्ष पैदा हुई। तीन विकल्प उन्होंने गिनाए, जिसमें पहला राजनीति से संन्यास, दूसरा अपना दल बनाने और तीसरा किसी नए साथी को चुनने का था। दिल्ली से जब उनकी वापसी हुई तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि पहला विकल्प अब समाप्त हो चुका है। यानि वे अब राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे।
उन्होंने समर्थकों का जुटान कर दूसरे और तीसरे विकल्प पर बातें आगे बढ़ाई है। इस कवायद से वे अपने प्रति अधिकाधिक सहानुभूति जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। वे यह खूब जानते हैं कि क्षेत्रीय दल झामुमो की खूबी और खामी क्या है। दिवासियों में झामुमो की गहरी पैठ का भी इन्हें अंदाजा है। यही वजह है कि समर्थकों के बीच जाकर वे अपने प्रभाव का आकलन करने में जुटे हैं।
बीजेपी की रणनीति, चंपई के साथ खड़े हैं प्रमुख नेता
बीजेपी की रणनीति चंपई सोरेन को साथ लेकर झामुमो के जनाधार में सेंधमारी करने की है। चंपई के प्रभाव क्षेत्र वाले कोल्हान के लिए यह महत्वपूर्ण इस मायने में भी है कि इस प्रमंडल की 14 विधानसभा सीटों पर 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का खाता नहीं खुल पाया था। चंपई सोरेन के आने से इस परिस्थिति में बदलाव की आस बीजेपी को है। यही वजह है कि पद से हटाये जाने के साथ ही बीजेपी के वैसे नेताओं ने भी इनके साथ एकजुटता दिखाई जो इनकी सरकार को हेमंत सोरेन-पार्ट दो करार दे रहे थे।
कोई एमएलए साथ नहीं, सभाओं में उमड़ रही भारी भीड़
चंपई सोरेन ने जब दिल्ली की राह पकड़ी थी तो उनके साथ कम से कम चार एमएलए के रहने की संभावना जताई गई थी। अब यह स्पष्ट हो गया है कि अभी कोई एमएलए उनका साथ देने को आगे नहीं आ रहा है। इन एमएलए ने हेमंत सोरेन के साथ मुलाकात में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि, राजनीति में कुछ भी असंभव है। फिलहाल, चंपई सोरेन अपने प्रभाव वाले इलाकों में लगातार जनसभाएं और बैठकें कर रहे हैं। उन्हें देखने-सुनने भारी भीड़ भी जुट रही है, जिससे चंपई सोरेन के रणनीतिकार भी उत्साहित हैं।