पटना। जेडीयू ने सेंट्रल मिनिस्टरआरसीपी सिंह का राज्यसभा का टिकट कट ही गया। जेडीयू के नेशनल प्रसिडेंट राजीव रंजन सिंह ने देर शाम रविवार को यह एलान किया कि झारखंड प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो को पार्टी राज्यसभा भेजेगी।
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जेडीय के कोटे में केवल एक सीट है। बीजेपी ने रविवार को जब अपने राज्यसभा के कैंडिडेट के नाम का ऐलान किया तो उसके एक घंटे के भीतर जेडीयू ने अपने कैंडिडेट के नाम का ऐलान कर दिया। यह पहला मौका है जब जेडीयू ने बिहार के बाहर अपनी किसी प्रदेश इकाई के पदाधिकारी को राज्यसभा भेजा है।
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पार्टी ने टिकट पर फैसला के लिए सीएम को किया था अधिकृत
राज्यसभा कैंडिडेट का नाम तय किये जाने को ले पिछले दिनों जेडीयू एमएलए की बैठक सीएम आवास में बुलाई गई। नेशनल प्रसिडेंट ललन सिंह की मौजूदगी में जेडीयू के सभी एमएलए ने सीएम नीतीश कुमार को राज्यसभा कैंडिडेट का नाम तय करने के लिए अधिकृत कर दिया था। उसी समय से यह अटकलें लग रही थीं कि आरसीपी सिंह का टिकट कट सकता है। कैंडिडेट के नाम की घोषणा में हो रहे विलंब की वजह भी यही थी।खीरू महतो ने रविवार को सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह व मंत्री श्रवण कुमार भी मौजूद रहे। खीरू महतो जेडीयू के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं।
ललन सिंह ने किया कैंडिडेट का एलान
सीएम के निर्देश पर पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने खीरू महतो को राज्यसभा का कैंडिडेट बनाये जाने का औपचारिक पत्र जारी किया। पत्र में कहा गया है कि झारखंड जदयू अध्यक्ष व एक्स एमएलए खीरू महतो को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जाता है। आरसीपी सिंह के बदले खीरू महतो को राज्यसभा उम्मीदवार बनाये जाने के सवाल पर जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि यह निर्णय दल के नेता सीएम नीतीश कुमार ने लिया है। पार्टी का निर्णय सबों को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। आरसीपी सिंह के सेंट्रल में मिनिस्टर बनने से नाराजगी के सवाल को ललन सिंह ने सिरे से खारिज किया। कहा कि हम कभी भी नाराज नहीं रहे। सेंट्रल में मिनिस्टर बनने के बाद आरसीपी सिंह जेडीयू के प्रतिनिधि थे।
पार्टी का कोई फैसला हुआ है तो उसे स्वीकार करना चाहिए
आरसीपी सिंह के राज्यसभा नहीं जाने पर जदयू की भागीदारी सेंट्रल कैबिनेट में नहीं होने के सवाल पर ललन सिंह ने कहा कि कैबिनेट में कौन मंत्री रहेगा या नहीं, इसका निर्णय पीएम को करना है। जहां तक जेडीयू का सवाल है, पार्टी नेता इस पर निर्णय लेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी के एकमात्र नेता नीतीश कुमार हैं। उन्होंने ही यह फैसला लिया है। पार्टी का कोई फैसला हुआ है तो उसे स्वीकार करना चाहिए। बाकी हो रही तमाम बातें काल्पनिक हैं।
अब मिनिस्टर नहीं रहेंगे आरसीपी
आरसीपी सिंह ने तीन दिन पहले सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात की थी। अपने समर्थकों को उन्होंने यह आश्वस्त किया था कि वे राज्यसभा जा रहे हैं, पर राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा आम हो चुकी थी कि आरसीपी सिंह को इस बार जदयू राज्यसभा नहीं भेजेगी। वह दो टर्म राज्यसभा में रह चुके हैं। सेंट्रल में मिनिस्टर बनने के पूर्व वे जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा में जदयू संसदीय दल के नेता भी रह चुके हैं। आइएएस अफसर रहे आरसीपी पहले सीएम नीतीश कुमार के वह प्रधान सचिव भी थे। राज्यसभा का टिकट कट जाने के बाद अब यह तय हो गया है कि वे अब सेंट्रल में मिनिस्टर नहीं रहेंगे। पीएमअगर चाहें तो वे अधिकतम छह महीने तक मिनिस्टर रह सकते हैं। उनका राज्यसभा का कार्यकाल जुलाई में खत्म हो जायेगा।