PoK में बगावत की आग! प्रदर्शनकारियों पर बरसी गोलियां, 30 मौतें; 200 घायल, इंटरनेट बंद कर उतारी सेना
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों में 30 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोग घायल हो गए। JAAC पर प्रतिबंध के बाद हालात बिगड़ गए हैं। इंटरनेट सेवाएं बंद कर सेना और रेंजर्स तैनात किए गए हैं।
नई दिल्ली/मुजफ्फराबाद (Threesocieties.com Desk): पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 4 पुलिसकर्मियों और 7 नागरिकों समेत कुल 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार मृतकों में 4 पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है।
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JAAC पर प्रतिबंध के बाद भड़का विरोध
हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं तथा अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। हिंसा की शुरुआत उस समय हुई जब पाकिस्तान प्रशासन ने नागरिक संगठन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को आतंकवाद-रोधी कानून के तहत प्रतिबंधित घोषित कर दिया। यह संगठन लंबे समय से क्षेत्र में आर्थिक, राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चला रहा है। प्रतिबंध के बाद संगठन ने व्यापक विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का आह्वान किया, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।
व्यापारी की मौत बनी हिंसा की वजह
रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को एक स्थानीय व्यापारी और पुलिस के बीच कथित विवाद हुआ था, जिसके बाद उसे गोली मार दी गई। बाद में उसका शव रावलकोट स्थित कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल लाया गया, जहां बड़ी संख्या में JAAC समर्थक जमा हो गए।इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव शुरू हो गया। देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई और कई स्थानों पर झड़पें फैल गईं।
दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
पुंछ सेक्टर के कमिश्नर सरदार वहीद खान के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की फायरिंग में 4 पुलिसकर्मी और एक राहगीर मारे गए। इसके बाद सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 6 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। वहीं JAAC नेतृत्व का आरोप है कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग कर रही है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की गई है। संगठन के नेताओं ने इसे "दमनात्मक कार्रवाई" और "नरसंहार" करार दिया है।
100 से ज्यादा गिरफ्तार, सेना और रेंजर्स तैनात
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। पाकिस्तान रेंजर्स, पंजाब पुलिस और सेना की अतिरिक्त टुकड़ियों को भी तैनात किया गया है। प्रशासन का दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने ऑटोमैटिक राइफलों, पेट्रोल बमों और अन्य हथियारों का इस्तेमाल कर सुरक्षाबलों पर हमला किया था, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।
यह हिंसा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और क्षेत्रीय सरकार के बीच चल रहे विवाद के दौरान हुई। PoK में JAAC और सरकार के बीच विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद चल रहा है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। JAAC इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?
JAAC और अन्य नागरिक संगठनों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
क्षेत्र में महंगाई और बिजली संकट का समाधान
स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय लोगों का अधिकार
आर्थिक और राजनीतिक सुधार
क्षेत्रीय विधानसभा चुनावों में 12 आरक्षित सीटों की व्यवस्था समाप्त करना
स्थानीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करना
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आरक्षित सीटों पर ऐसे उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं जो क्षेत्र में रहते तक नहीं हैं, जिससे स्थानीय जनता के हित प्रभावित होते हैं।
आसिम मुनीर के सामने नई चुनौती
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के सामने यह एक नई राजनीतिक और सुरक्षा चुनौती बनकर उभरी है। एक तरफ पाकिस्तान को पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ PoK में बढ़ता असंतोष सरकार और सेना के लिए चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तो किया जा रहा है, लेकिन विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के मामले में उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
पूरे क्षेत्र में तनाव, इंटरनेट सेवाएं बंद
प्रशासन ने हालात को देखते हुए मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार गश्त कर रही हैं और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच जल्द संवाद नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में PoK में हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।






