Highlights:
- कोटा से तीन संदिग्ध गिरफ्तार: मुंबई में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से तीन लोगों को पकड़ा गया
- हत्या की नीयत का पुलिस का दावा: मुंबई पुलिस के डीसीपी के मुताबिक, गोलियां चलाने के तरीके से आरोपियों के इरादे गंभीर नजर आते हैं
- बिहार और हरियाणा के निवासी: गिरफ्तार संदिग्धों में दो हरियाणा और एक बिहार का रहने वाला बताया गया है
- ट्रेन से भागने की कोशिश: वारदात के बाद संदिग्ध मुंबई से निकलकर ट्रेन के जरिए राजस्थान पहुंचे
मुंबई/कोटा (Threesocieties.com Desk): बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस ने गंभीर खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों का इरादा केवल डराने का नहीं, बल्कि अभिनेता की हत्या करने का था। मामले में तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर हमले की साजिश, कथित कॉन्ट्रैक्ट और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के अनुसार, पकड़े गए तीनों संदिग्धों में दो हरियाणा और एक बिहार का रहने वाला है। शुरुआती जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कथित तौर पर जुड़े अनिल पंडित का नाम भी सामने आया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि फायरिंग की योजना किसने बनाई, आरोपियों को किसने निर्देश दिए और इस वारदात में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
15 घंटे के भीतर कोटा में पकड़े गए संदिग्ध
टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की घटना के बाद मुंबई पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस को उनके मुंबई से बाहर निकलने और ट्रेन से यात्रा करने की जानकारी मिली। इसके बाद राजस्थान पुलिस को अलर्ट किया गया।मुंबई पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर राजस्थान एजीटीएफ और कोटा सिटी पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की। तीनों संदिग्धों को कोटा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सफर करते समय पकड़ा गया।
पुलिस के मुताबिक, वे पुणे-जयपुर एक्सप्रेस से जयपुर की ओर जा रहे थे। उन्हें ट्रेन के जनरल कोच से हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, फायरिंग रविवार शाम करीब सात बजे हुई थी और अगले दिन सुबह लगभग 10:30 बजे संदिग्धों को पकड़ लिया गया। इस तरह पुलिस ने करीब 15 घंटे के भीतर उन्हें दबोच लिया।पुलिस अब आरोपियों की यात्रा, संपर्कों और वारदात के बाद अपनाए गए रास्ते की जांच कर रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, वे जयपुर और दिल्ली के रास्ते नेपाल भागने की योजना बना रहे थे। हालांकि, फरारी की पूरी योजना और इसमें दूसरे लोगों की भूमिका की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
बिहार और हरियाणा के रहने वाले हैं तीनों संदिग्ध
राजस्थान पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए तीन संदिग्धों में दो हरियाणा और एक बिहार का निवासी है। सामने आई जानकारी में बिहार के बेगूसराय जिले के 22 वर्षीय ऋतिक कुमार उर्फ रोशन का नाम शामिल है। वह मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाके में रहता था और रैपिडो राइडर के रूप में काम करता था। दूसरे संदिग्ध रेहान को हरियाणा के सोनीपत का निवासी बताया गया है। तीसरे संदिग्ध की पहचान और अन्य विवरणों को लेकर पुलिस की पूछताछ जारी है।
शुरुआती रिपोर्टों में एक आरोपी के नाबालिग होने की बात भी सामने आई थी, लेकिन बाद में पुलिस ने तीनों आरोपियों के नाबालिग होने से संबंधित दावे का खंडन किया। पुलिस अब उनकी उम्र, पृष्ठभूमि, आपसी संबंध और कथित आपराधिक नेटवर्क की जांच कर रही है। पुलिस की जांच का मुख्य सवाल यह है कि क्या तीनों ने मिलकर फायरिंग की थी या इनमें से कुछ लोग वारदात को अंजाम देने और फरार होने में अलग-अलग भूमिका निभा रहे थे। गिरफ्तारी के बाद उनकी भूमिका की पुष्टि साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर की जाएगी।
10 दिनों तक टाइगर श्रॉफ की रेकी करने का शक
मुंबई पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, संदिग्ध पिछले करीब 10 दिनों से टाइगर श्रॉफ की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। जांच में उनके घर, जिम और आने-जाने के संभावित रास्तों की रेकी किए जाने की आशंका जताई गई है।पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने अभिनेता की दिनचर्या समझने के लिए सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो, पापराजी के फुटेज और ब्लॉगर्स के कंटेंट का भी इस्तेमाल किया। इससे उन्हें अभिनेता के संभावित कार्यक्रमों और लोकेशन के बारे में जानकारी मिली होगी।
जांच से जुड़े इनपुट के अनुसार, फायरिंग से पहले संदिग्धों ने घटनास्थल के आसपास करीब 45 मिनट बिताए थे। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले के लिए जगह और समय का चुनाव किसने किया था।जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि हमले की योजना पहले से बनाई गई थी। हालांकि, रेकी की अवधि, सोशल मीडिया से जानकारी जुटाने और हमले के पीछे की पूरी साजिश से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के अंतिम निष्कर्षों के बाद ही होगी।
टाइगर श्रॉफ की कार पर कैसे हुई फायरिंग?
रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार शाम टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी की घटना हुई। मुंबई पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि गोली चलाने के तरीके को देखते हुए मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने अभिनेता को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, टाइगर श्रॉफ को गोली नहीं लगी, लेकिन उनके बाएं हाथ में बारूद और कांच के टुकड़ों से चोट आई। फायरिंग के दौरान उनके ड्राइवर को भी चोट लगने की बात सामने आई है।
घटना के बाद अभिनेता की सुरक्षा और हमले के पीछे की वजह को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हमलावरों ने सीधे अभिनेता को निशाना बनाया था या किसी अन्य उद्देश्य से फायरिंग की गई थी।मुंबई पुलिस ने मामले की जांच में कई पहलुओं को शामिल किया है। इनमें घटनास्थल के साक्ष्य, गोलीबारी का तरीका, आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों और वारदात से पहले तथा बाद की गतिविधियां शामिल हैं।
फायरिंग के बाद बाइक छोड़कर ट्रेन से भागे संदिग्ध
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वारदात के बाद संदिग्ध एसवी रोड से विले पार्ले और अंधेरी की ओर गए। इसके बाद उन्होंने अंधेरी वेस्ट रेलवे स्टेशन के पास अपनी मोटरसाइकिल छोड़ दी और ट्रेन में सवार हो गए।पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े सुरागों के आधार पर उनकी गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की। बाइक की बरामदगी और ट्रेन से यात्रा करने की जानकारी जांच में अहम कड़ी मानी जा रही है।
मुंबई से निकलने के बाद संदिग्ध महाराष्ट्र की सीमा पार कर गुजरात की ओर गए और फिर राजस्थान पहुंचे। पुलिस को इनपुट मिलने के बाद कोटा में रेलवे स्टेशन पर उनकी तलाश की गई।पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बाइक किसकी थी, उसे किसने उपलब्ध कराया था और फरारी के दौरान आरोपियों की मदद करने वाला कोई अन्य व्यक्ति भी था या नहीं।
लॉरेंस गैंग के कथित संपर्क की जांच
इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कथित तौर पर जुड़े अनिल पंडित का नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में हरियाणा के रेहान के संपर्क का संबंध अनिल पंडित से होने की बात सामने आई है।रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अनिल पंडित ने टाइगर श्रॉफ पर हमले का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पोस्ट और एक ऑडियो क्लिप के जरिए उसने कथित तौर पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा भी किया।
हालांकि, किसी सोशल मीडिया पोस्ट या ऑडियो क्लिप में जिम्मेदारी लेने का दावा अपने आप में अपराध में संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं है। पुलिस इन दावों की सत्यता, संबंधित खातों और आरोपियों के बीच संपर्कों की जांच कर रही है।जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित कॉन्ट्रैक्ट किसके जरिए दिया गया, हमले के लिए किसी तरह का भुगतान हुआ या नहीं और वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों को किसने संसाधन उपलब्ध कराए। इस मामले में कथित गैंग कनेक्शन की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
सलमान खान को धमकी देने के दावे की भी जांच
रिपोर्टों के मुताबिक, अनिल पंडित के नाम से सामने आई सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो क्लिप में अभिनेता सलमान खान को भी धमकी देने तथा लॉरेंस बिश्नोई से माफी मांगने की बात कही गई है।पुलिस इन पोस्ट और ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन संदेशों को किसने जारी किया और क्या उनका टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले से सीधा संबंध है। सोशल मीडिया पर किए गए दावों और वास्तविक आपराधिक साजिश के बीच अंतर स्थापित करना जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, तकनीकी जानकारी और आरोपियों के बयानों का मिलान कर रही है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने की मुलाकात
फायरिंग की घटना के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के टाइगर श्रॉफ के घर पहुंचने की जानकारी भी सामने आई। बताया गया कि उन्होंने अभिनेता और उनके परिवार से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया तथा सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिया। रिपोर्टों के अनुसार, घटना के बाद टाइगर श्रॉफ और उनकी मां आयशा श्रॉफ सदमे में थे। शिंदे ने सार्वजनिक हस्तियों को धमकी देने और उन पर हमले की घटनाओं को गंभीर बताते हुए सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इस घटना ने एक बार फिर फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा, सोशल मीडिया के जरिए मिलने वाली धमकियों और संगठित अपराध से जुड़े कथित नेटवर्क की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं।
अब आगे क्या करेगी पुलिस?
- तीनों संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण हमले की पूरी साजिश का पता लगाना है। पुलिस कई अहम बिंदुओं पर काम कर रही है।
- आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल संपर्कों की जांच।
- फायरिंग से पहले की गई कथित रेकी के साक्ष्य जुटाना।
- घटनास्थल और फरारी के रास्ते से जुड़े सीसीटीवी फुटेज की जांच।
- बरामद मोटरसाइकिल और अन्य भौतिक साक्ष्यों का सत्यापन।
- कथित अनिल पंडित कनेक्शन और सोशल मीडिया दावों की जांच।
- यह पता लगाना कि हमले के लिए किसी ने आर्थिक मदद या हथियार उपलब्ध कराए थे या नहीं।
- वारदात में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की पहचान।
पुलिस की जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि फायरिंग के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था, आरोपियों की भूमिका कितनी थी और क्या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क का हाथ था।