HighLights:
- बोकारो स्टील प्लांट में स्थायी नियोजन की मांग को लेकर 12 दिनों से जारी विस्थापितों की भूख हड़ताल समाप्त हो गई
- उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में बोकारो निवास में त्रिपक्षीय वार्ता के बाद आंदोलन खत्म करने पर सहमति बनी
- बीएसएल से प्रशिक्षित 1,500 विस्थापित अप्रेंटिस अभ्यर्थियों के नियोजन का प्रस्ताव आगे बढ़ाने पर सहमति बनी
- विस्थापित परिवारों के योग्य सदस्यों के लिए चतुर्थवर्गीय पदों पर स्थायी नियोजन की नीति बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया
बोकारो (Threesocieties.com Desk): बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में स्थायी रोजगार की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे विस्थापितों के आंदोलन में बुधवार को महत्वपूर्ण मोड़ आया। 12 दिनों से जारी धरना और भूख हड़ताल त्रिपक्षीय वार्ता के बाद समाप्त हो गई। जिला प्रशासन, बीएसएल प्रबंधन और विस्थापित अप्रेंटिस संघ के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में मांगों के समाधान के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।

सेक्टर-5 स्थित बोकारो निवास में उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में हुई बैठक में विस्थापितों की दो प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई। इनमें बीएसएल से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 1,500 विस्थापित अप्रेंटिस अभ्यर्थियों के नियोजन का प्रस्ताव और विस्थापित परिवारों के योग्य सदस्यों के लिए चतुर्थवर्गीय पदों पर स्थायी नियुक्ति की नीति तैयार करना शामिल है।बैठक में तय हुआ कि दोनों प्रस्ताव सात दिनों के भीतर संबंधित प्राधिकारों को भेजे जाएंगे। इसके बाद राज्य सरकार और सेल के संबंधित प्राधिकारों के स्तर पर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। वार्ता में बनी सहमति के बाद विस्थापित प्रतिनिधियों ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने जूस पीकर अनशन तोड़ा।
1500 अप्रेंटिसों के नियोजन का प्रस्ताव होगा आगे
बोकारो स्टील प्लांट में प्रशिक्षित विस्थापित अप्रेंटिस अभ्यर्थियों के स्थायी नियोजन का मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है। विस्थापित अप्रेंटिस संघ की मांग है कि बीएसएल में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके योग्य अभ्यर्थियों को संयंत्र में स्थायी रोजगार का अवसर दिया जाए। त्रिपक्षीय वार्ता में बीएसएल से प्रशिक्षित 1,500 विस्थापित अप्रेंटिस अभ्यर्थियों के नियोजन से संबंधित प्रस्ताव आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इस प्रस्ताव को विधायक श्वेता सिंह के माध्यम से जिला प्रशासन और बीएसएल के शीर्ष प्रबंधन तक पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
बैठक में प्रस्ताव को सात दिनों के भीतर संबंधित प्राधिकारों को भेजने की समय-सीमा निर्धारित की गई। बीएसएल प्रबंधन की ओर से प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए सेल के संबंधित प्रभाग तक भेजा जाएगा। हालांकि, इस सहमति का अर्थ यह नहीं है कि 1,500 अप्रेंटिस अभ्यर्थियों की नियुक्ति को अंतिम मंजूरी मिल गई है। फिलहाल नियोजन से संबंधित प्रस्ताव को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। नियुक्ति के लिए संबंधित प्राधिकारों की स्वीकृति और आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
चतुर्थवर्गीय पदों पर स्थायी नियुक्ति की नीति बनाने की मांग
विस्थापितों की दूसरी प्रमुख मांग उनके परिवारों के योग्य सदस्यों को बीएसएल में चतुर्थवर्गीय पदों पर स्थायी नियोजन का अवसर देने से संबंधित है। विस्थापित परिवारों का कहना है कि संयंत्र की स्थापना और विस्तार से जुड़े विस्थापन के कारण प्रभावित परिवारों के योग्य सदस्यों को रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। इसी मांग को लेकर आंदोलनकारी लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं। वार्ता में चतुर्थवर्गीय पदों पर स्थायी नियोजन के लिए ठोस नीति तैयार करने का प्रस्ताव बनाने पर सहमति बनी। इस प्रस्ताव को विधायक श्वेता सिंह के माध्यम से उपायुक्त और बीएसएल के निदेशक प्रभारी तक पहुंचाया जाएगा।
प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन और बीएसएल प्रबंधन अपने-अपने स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। इसके बाद संबंधित विभागों और प्राधिकारों के स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। विस्थापितों की उम्मीद है कि इस पहल से स्थायी रोजगार से जुड़ा वर्षों पुराना मुद्दा समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगा।
सात दिनों में राज्य सरकार और सेल तक पहुंचेंगे प्रस्ताव
त्रिपक्षीय वार्ता में दोनों प्रस्तावों को सात दिनों के भीतर संबंधित प्राधिकारों को भेजने का निर्णय लिया गया। जिला प्रशासन के स्तर पर विस्थापितों की मांगों से संबंधित सहमति पत्र तैयार कर आगे भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उपायुक्त अजय नाथ झा ने बताया कि डीपीएलआर यानी निदेशक, परियोजना भूमि एवं पुनर्वास के माध्यम से सहमति पत्र राज्य सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार के स्तर से प्रस्ताव को केंद्र सरकार के संबंधित प्राधिकारों तक पहुंचाया जाएगा।
दूसरी ओर, बीएसएल प्रबंधन नियोजन से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए सेल के संबंधित प्रभाग को भेजेगा। इस तरह दोनों प्रस्तावों पर प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने विस्थापितों की मांगों को राज्य सरकार और सेल बोर्ड के समक्ष प्रभावी तरीके से रखने का भरोसा दिया है। हालांकि, प्रस्ताव भेजे जाने के बाद उन पर निर्णय लेने में संबंधित प्राधिकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई त्रिपक्षीय वार्ता
विस्थापितों के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए बोकारो निवास में आयोजित बैठक में जिला प्रशासन, बीएसएल प्रबंधन और विस्थापित अप्रेंटिस संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त अजय नाथ झा ने की। इसमें विधायक श्वेता सिंह ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा निदेशक, परियोजना भूमि एवं पुनर्वास (डीपीएलआर), बोकारो की निदेशक पूर्णिमा कुमारी तथा बीएसएल के कार्यपालक निदेशक (एचआर) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान विस्थापितों की मांगों, स्थायी नियोजन की संभावनाओं और प्रस्तावों को संबंधित प्राधिकारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर तत्काल निर्णय लेना उनके मौजूदा कार्यक्षेत्र से बाहर है। इसके बावजूद सकारात्मक पहल करने और संबंधित स्तर पर प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया गया। बैठक में यह भी तय हुआ कि विस्थापितों की मांगों के समाधान के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार और सेल के संबंधित प्राधिकारों की भूमिका सुनिश्चित की जाएगी।
विधायक श्वेता सिंह बोलीं- रास्ता मिला है, मंजिल नहीं
वार्ता के बाद बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने विस्थापितों के स्थायी नियोजन की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विस्थापित अप्रेंटिस अभ्यर्थियों को स्थायी नियुक्ति मिलनी चाहिए और चतुर्थवर्गीय पदों पर विस्थापितों के लिए नियोजन की व्यवस्था होनी चाहिए। विधायक ने माना कि यह मामला काफी पुराना और जटिल है। इसलिए इसके समाधान में समय लग सकता है। उन्होंने वार्ता को सफल बताते हुए कहा, "रास्ता मिला है, मंजिल नहीं।" उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वार्ता के बाद समाधान की दिशा में पहल जरूर हुई है, लेकिन विस्थापितों की सभी मांगों को पूरा करने के लिए अभी आगे की प्रक्रिया बाकी है। विधायक ने प्रस्तावों को संबंधित प्राधिकारों तक पहुंचाने और विस्थापितों की मांगों के समाधान के लिए पहल करने पर जोर दिया।
विस्थापित अप्रेंटिस संघ ने आंदोलन समाप्त करने का किया ऐलान
विस्थापित अप्रेंटिस संघ के प्रतिनिधि प्रदीप सोरेन ने वार्ता को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की ओर से सात दिनों के भीतर सकारात्मक पहल करने का आश्वासन मिला है। इसी आधार पर संघ ने भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग बीएसएल में प्रशिक्षित विस्थापित अप्रेंटिस अभ्यर्थियों को स्थायी रोजगार देना और विस्थापित परिवारों के योग्य सदस्यों के लिए चतुर्थवर्गीय पदों पर नियोजन सुनिश्चित करना है। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और समाधान की दिशा में ठोस प्रगति नहीं हुई, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है। इस तरह भूख हड़ताल समाप्त होने के बाद भी विस्थापितों की निगाहें अगले सात दिनों में होने वाली कार्रवाई और संबंधित प्राधिकारों के निर्णय पर टिकी रहेंगी।
प्रशासन ने शांतिपूर्ण आंदोलन को बताया अधिकार
उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है। बीएसएल प्रबंधन और विस्थापितों के बीच मध्यस्थता करना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि विस्थापितों की समस्याओं का स्थायी समाधान नीतिगत निर्णय के माध्यम से ही संभव है। इसलिए मांगों को संबंधित स्तर पर भेजकर आवश्यक कार्रवाई कराने की पहल की जाएगी। जिला प्रशासन का प्रयास है कि विस्थापितों की मांगों को उचित मंच पर रखा जाए और नियोजन से जुड़े लंबित मुद्दों पर आगे का रास्ता निकले।
बैठक में ये अधिकारी और प्रतिनिधि रहे मौजूद
त्रिपक्षीय वार्ता में अपर समाहर्ता, चास के अनुमंडल पदाधिकारी, चास के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, निदेशक परियोजना भूमि एवं पुनर्वास, बोकारो की निदेशक पूर्णिमा कुमारी, सहायक समाहर्ता, बोकारो तथा बीएसएल के कार्यपालक निदेशक (एचआर) और मुख्य महाप्रबंधक (एचआर) सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। बैठक में भाजपा जिला मंत्री एंजेला सिंह तथा विस्थापित प्रतिनिधि सुनील महतो, चंद्रकांत महतो, अजय महतो, रघुनाथ महतो और अन्य लोग भी शामिल हुए।