HighLights:
- भागलपुर में गंगा नदी के बियाडा घाट पर बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम का जहाज पांच दिनों से है फंसा
- गंगा का जलस्तर घटने और गाद जमा होने के कारण जहाज उथले पानी में अटक गया
- करीब 10 फीट तक ड्रेजिंग कराने के बावजूद जहाज को निकालने में सफलता नहीं मिली
- अब जहाज को निकालने के लिए असम के गुवाहाटी से विशेष शिप लॉन्चिंग एयरबैग मंगाए जा रहे हैं
भागलपुर (Threesocieties.com Desk): भागलपुर। गंगा नदी के जलस्तर में गिरावट के कारण भागलपुर के बियाडा घाट पर फंसे पर्यटन जहाज एमवी राजेंद्र प्रसाद को निकालने का अभियान लगातार जारी है। जेटी नंबर-1 के पूर्वी छोर के समीप अटका यह जहाज गाद और उथले पानी के कारण अपनी जगह से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) और तकनीकी दल की ओर से जहाज को निकालने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है।
जहाज को निकालने के लिए पहले ड्रेजिंग के जरिए उसके आसपास की गाद हटाई गई। इसके बाद दूसरे शक्तिशाली जहाज की मदद से टोचन कर उसे गहरे पानी की ओर खींचने की कोशिश की गई। दोनों प्रयास नाकाम रहने के बाद अब विशेष शिप लॉन्चिंग एयरबैग की मदद लेने की योजना बनाई गई है। इसके लिए असम के गुवाहाटी से उपकरण मंगाए जा रहे हैं।
10 फीट तक ड्रेजिंग, फिर भी नहीं निकला जहाज
एमवी राजेंद्र प्रसाद को निकालने के लिए पिछले तीन दिनों से ड्रेजिंग का काम कराया जा रहा है। जहाज के आसपास करीब 10 फीट तक गहराई में खुदाई कर गाद हटाने की कोशिश की गई। इसके बावजूद जहाज अपनी जगह से नहीं हिल सका। इसकी प्रमुख वजह गंगा नदी के जलस्तर में गिरावट और जहाज के आसपास जमा गाद को माना जा रहा है। पानी कम होने से जहाज को पर्याप्त गहराई नहीं मिल पा रही है, जिससे उसे सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाना चुनौती बन गया है।
ड्रेजिंग का उद्देश्य जहाज के आसपास पर्याप्त गहराई तैयार करना था, ताकि उसे मुख्य धारा की ओर ले जाया जा सके। हालांकि, अब तक की कार्रवाई से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के कारण रेस्क्यू अभियान में वैकल्पिक तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है।
दूसरे जहाज से टोचन करने की कोशिश भी नाकाम
ड्रेजिंग के बाद बुधवार को एमवी राजेंद्र प्रसाद को निकालने के लिए एक अन्य शक्तिशाली जहाज की मदद ली गई। दूसरे जहाज से टोचन कर फंसे हुए जहाज को गहरे पानी की ओर खींचने की कोशिश की गई। हालांकि, यह प्रयास भी सफल नहीं हो सका। लगातार मिल रही असफलताओं के बीच तकनीकी दल अब जहाज को निकालने के लिए दूसरे विकल्पों पर काम कर रहा है। जहाज के पिछले हिस्से तक भारी अर्थमूवर यानी जेसीबी पहुंचाने के लिए नदी तट पर वैकल्पिक रैंप और रास्ता तैयार किया जा रहा है। वहीं, अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की ड्रेजिंग मशीन भी मौके पर मौजूद है। रेस्क्यू अभियान की चुनौती यह है कि जहाज को बाहर निकालते समय उसके निचले हिस्से और ढांचे को नुकसान न पहुंचे। इसलिए अगली कार्रवाई में तकनीकी संतुलन और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना होगा।
गुवाहाटी से मंगाए जा रहे शिप लॉन्चिंग एयरबैग
लगातार दो प्रमुख प्रयासों के नाकाम होने के बाद अब एमवी राजेंद्र प्रसाद को निकालने के लिए शिप लॉन्चिंग एयरबैग तकनीक का सहारा लेने की तैयारी है। जहाज का संचालन कर रही अधिकृत एजेंसी के प्रबंध निदेशक प्रणव कुमार के अनुसार, जहाज को सुरक्षित निकालने के लिए विभिन्न तकनीकी विकल्पों पर काम किया जा रहा है। इसके तहत विशेष प्रकार के मजबूत रबर से बने बेलनाकार शिप लॉन्चिंग एयरबैग असम के गुवाहाटी से सड़क मार्ग के जरिए मंगाए जा रहे हैं। इन एयरबैग का इस्तेमाल जहाज को नीचे से सहारा देने और उसे धीरे-धीरे आगे खिसकाने के लिए किया जा सकता है।
यह तकनीक सामान्य तौर पर जहाजों को पानी में उतारने या उन्हें स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल की जाती है। हालांकि, भागलपुर में फंसे जहाज को निकालने के लिए इसका इस्तेमाल स्थानीय परिस्थितियों, पानी की गहराई और तकनीकी टीम के आकलन के अनुसार किया जाएगा।
कैसे काम करेंगे शिप लॉन्चिंग एयरबैग?
शिप लॉन्चिंग एयरबैग विशेष रूप से तैयार किए गए मजबूत और लचीले रबर के बेलनाकार उपकरण होते हैं। इन्हें जहाज के निचले हिस्से के नीचे उचित स्थानों पर लगाया जाता है। इसके बाद कंप्रेसर की सहायता से इनमें नियंत्रित दबाव में हवा भरी जाती है। हवा भरने पर एयरबैग जहाज के नीचे सहारा और कुशन तैयार करते हैं। इससे जहाज के भार को संभालने और उसे नियंत्रित तरीके से आगे खिसकाने में मदद मिल सकती है। सही तकनीकी व्यवस्था के साथ इनका इस्तेमाल जहाज को पानी की ओर स्थानांतरित करने के लिए किया जा सकता है।
एमवी राजेंद्र प्रसाद के मामले में भी योजना है कि एयरबैग की मदद से जहाज को गाद और उथले हिस्से से निकालकर गहरे पानी की दिशा में ले जाया जाए। हालांकि, इस प्रक्रिया की सफलता जहाज के भार, उसके नीचे की जमीन की स्थिति, पानी की उपलब्ध गहराई और एयरबैग की सही स्थापना पर निर्भर करेगी। तकनीकी टीम को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जहाज को खिसकाते समय उसका संतुलन बना रहे और किसी तरह की संरचनात्मक क्षति न हो।
रेस्क्यू अभियान पूरा होने में लग सकते हैं 48 घंटे
जहाज को निकालने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी के बीच अब सबकी नजर एयरबैग के पहुंचने और उन्हें लगाने की प्रक्रिया पर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जहाज को पूरी तरह सुरक्षित निकालने और उसका परिचालन फिर से शुरू करने में लगभग 48 घंटे और लगने का अनुमान है।हालांकि, यह समय अनुमानित है। एयरबैग की उपलब्धता, उन्हें लगाने की प्रक्रिया, नदी में पानी की गहराई और तकनीकी परिस्थितियों के आधार पर अभियान में कम या ज्यादा समय लग सकता है। फिलहाल, जहाज को निकालने के लिए संबंधित एजेंसियां उपलब्ध संसाधनों और तकनीकी विकल्पों के जरिए प्रयास कर रही हैं।
गंगा का जलस्तर घटने से यात्रियों की परेशानी बढ़ी
गंगा नदी में जलस्तर कम होने का असर केवल पर्यटन जहाज तक सीमित नहीं है। बियाडा घाट पर स्थायी जेटी और नदी की मुख्य धारा के बीच की दूरी भी बढ़ गई है। इससे यात्रियों को नावों और जहाजों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। पानी घटने के कारण घाट से नावों तक पहुंचने के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। यात्रियों की सुविधा और आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए जेटी की लंबाई बढ़ाने का काम भी किया जा रहा है। गंगा पार कर रोजाना आने-जाने वाले लोगों के लिए यह स्थिति खास तौर पर परेशानी का कारण बन सकती है। नौकरीपेशा लोगों, स्थानीय यात्रियों और अन्य जरूरतों के लिए नदी पार करने वालों को घाट पर अतिरिक्त समय देना पड़ सकता है।
बुधवार दोपहर दो बजे तक 8,000 से अधिक यात्रियों ने की गंगा पार
शारदीय दुर्गापूजा की सरकारी और निजी छुट्टियां समाप्त होने के बाद बुधवार को गंगा पार करने वाले यात्रियों की संख्या में काफी भीड़ देखी गई। बियाडा घाट प्रबंधन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बुधवार दोपहर दो बजे तक ही 8,000 से अधिक यात्री गंगा पार कर चुके थे। यात्रियों की आवाजाही को देखते हुए गुरुवार को भी घाट पर भीड़ रहने की संभावना जताई गई। ऐसे में जेटी तक पहुंचने के रास्ते, नावों की आवाजाही और यात्रियों की सुविधा बनाए रखना संबंधित प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण होगा। नदी के घटते जलस्तर के बीच यात्रियों को नावों तक पहुंचने में हो रही कठिनाई यह भी दिखाती है कि जलमार्ग से आवागमन करने वाले लोगों के लिए नदी की मौजूदा परिस्थितियां कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।
जहाज को निकालना क्यों बना चुनौती?
एमवी राजेंद्र प्रसाद को निकालने में अब तक आई दिक्कतों के पीछे कई परिस्थितियां एक साथ काम कर रही हैं।
पहली वजह: गंगा का घटता जलस्तर। पानी कम होने से जहाज को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त गहराई नहीं मिल रही है।
दूसरी वजह: गाद और रेत का जमाव। जहाज के आसपास जमा गाद उसे अपनी जगह से निकालने में बाधा पैदा कर रही है।
तीसरी वजह: ड्रेजिंग के बाद भी सफलता नहीं। करीब 10 फीट तक ड्रेजिंग कराने के बावजूद जहाज को निकालना संभव नहीं हो पाया।
चौथी वजह: टोचन का विफल होना। दूसरे जहाज से खींचने का प्रयास भी सफल नहीं रहा, जिससे वैकल्पिक तकनीक अपनाने की जरूरत पड़ी।
इन परिस्थितियों में शिप लॉन्चिंग एयरबैग से जहाज को निकालने का प्रयास अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब एयरबैग तकनीक पर टिकी उम्मीदें
भागलपुर के बियाडा घाट पर पांच दिनों से फंसे एमवी राजेंद्र प्रसाद को निकालने के लिए अब तक ड्रेजिंग और टोचन जैसे उपाय आजमाए जा चुके हैं। लेकिन इनसे सफलता नहीं मिलने के बाद गुवाहाटी से विशेष शिप लॉन्चिंग एयरबैग मंगाने का निर्णय लिया गया है। अब रेस्क्यू अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एयरबैग को जहाज के नीचे किस तरह स्थापित किया जाता है और नदी की मौजूदा परिस्थितियों में जहाज को सुरक्षित रूप से गहरे पानी तक पहुंचाना कितना संभव हो पाता है। दूसरी ओर, गंगा का जलस्तर कम होने से बियाडा घाट पर यात्रियों की परेशानी भी बनी हुई है। ऐसे में जहाज को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ घाट पर सामान्य आवागमन और यात्रियों की सुविधा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।